मखाना के आयुर्वेदिक स्वास्थ्य लाभ Health Benefits of Makhana

मखाना के आयुर्वेदिक स्वास्थ्य लाभ Health Benefits of Makhana

मखाना ह्रदय को बल प्रदान करता है और रक्ताल्पता में बहुत गुणकारी है. यह वीर्य की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि करता है, शीघ्रपतन को रोकता है, कामेच्छा को बढ़ाता है और महिलाओं की बंध्यता निवारण में सहायक है.

फॉक्स नट का पौधा वनस्पति शास्त्र की “निम्फेसी” फैमिली में आता है. यह भारत में सामान्यतया “मखाना” के नाम से जाना जाता है. यह पानी में उगता है और भारत, कोरिया, जापान और रूस में पाया जाता है.

मखाने के पौधे में तना नहीं होता है. इसकी पत्तियाँ लम्बी और गोलाकार होती हैं तथा इस पर चमकीले बैंगनी रंग के पुष्प लगते हैं. पूरा पौधा छोटे कांटो (कंटक) से घिरा होता है. मखाने के पौधे की पत्तियों की ऊपरी सतह हरे रंग और निचली सतह बैंगनी रंग लिए होती हैं. इस पौधे पर छोटे संतरे के आकार के फल लगते हैं. प्रत्येक फल में मटर के दाने के आकार के 8-10 बीज होते हैं.

आयुर्वेद के अनुसार मखाना (तल मखाना) के स्वास्थ्य लाभ या फायदे

आयुर्वेदिक शास्त्र में मखाने के गुणों का वर्णन इस प्रकार किया गया है

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आयुर्वेदिक शास्त्र के अनुसार मखाना स्वाद में मीठा (मधुर रस) और पाचन में भारी (गुरु) होता है. यह शरीर के उत्तकों में  नमी का स्तर बनाए रखता है (स्निग्ध और शीत वीर्य).

आयुर्वेदिक औषधियों में मखाने के बीजों का प्रयोग किया जाता है. मखाना वात और पित्त दोष को कम करता है. यह ह्रदय को बल प्रदान करता है और रक्ताल्पता में बहुत गुणकारी है. यह वीर्य या शुक्राणु की मात्रा और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि करता है, शीघ्रपतन को रोकता है, कामेच्छा को बढ़ाता है और महिलाओं की बंध्यता निवारण में सहायक है. यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तम्भन दोष ) में प्रयुक्त होने वाली औषधियों का महत्वपूर्ण घटक है. यह शरीर की पुष्टि करता है और उर्जा का स्तर भी बढ़ाता है. इसके कामोद्वीपक गुणों के कारण इसे वृश्यादी समूह में रखा गया है. इस समूह के अंतर्गत आने वाली औषधियों का प्रयोग वाजीकरण चिकित्सा में किया जाता है.

मखाना के आयुर्वेदिक औषधीय गुण

मखाना शरीर में नमी का स्तर बढ़ाकर स्त्रावों का चिपचिपापन बढ़ा देता है. इसीलिए यह वीर्य की मात्रा और गुणवत्ता में वृद्धि करता है और नपुसंकता में उपयोगी है. यह महिलाओं की बंध्यता निवारण में सहायक है और वात और पित्त दोष को कम करता है. यह शरीर को बल प्रदान करता है और दाह को कम करता है और प्यास को शांत करता है.

अन्य वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों में मखाना का उपयोग

पारंपरिक चीनी औषधीय सिंद्धांत के अनुसार मखाने का उपयोग प्लीहा और वृक्क (किडनी) को शक्ति प्रदान करने के लिए किया जाता है. यह स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, स्नायुशूल, असंयमिता, जीर्ण अतिसार आदि स्थितियों में सहायता करता है. जड़ी-बूटी विशेषज्ञों के अनुसार यह वीर्य के शीघ्र स्खलन को रोकने और अधिक आयु के पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ाने में सहायक है. (मखाने के इन्ही गुणों के कारण आयुर्वेद में इसे वाजीकारक द्रव्यों की श्रेणी में रखा गया है.) मखाना गठिया, एरेक्टाइल डिसफंक्शन और ज़रता की स्थितियों में भी सहायक है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं और यह पाचन, श्वसन तंत्र का शोधन करने और बहुमूत्रता को रोकने में भी लाभदायक है.

मखाना कैसे खाये

मखाने की खीर

किसी भारी तली वाले बर्तन में 1 कप मखाने को 3 चम्मच घी में भून लीजिये. भूने हुए मखाने को दरदरा पीस लीजिये. 2 कप दूध को उबालिए और उसमें मखाने के चूर्ण को मिला दीजिये. अब इसमें ¾ कप चीनी मिलाकर अच्छी तरह हिलाइए. इसे कुछ मिनिट उबलने दीजिये. यदि आप चाहें तो इसमें आपकी आवश्यकतानुसार गर्म दूध मिला सकते हैं. अब इसे आंच पर से उतारकर दालचीनी पाउडर, कटे हुए बादाम, काजू और किशमिश मिलाकर परोंसे.

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